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बिहार में गैर क्रीमीलेयर प्रमाणपत्र में जाति-आय-आवासीय की जरूरत नहीं, मोदी सरकार का बड़ा फैसला!



बिहार में गैर क्रीमीलेयर प्रमाणपत्र में जाति-आय-आवासीय की जरूरत नहीं, मोदी सरकार का बड़ा फैसला

PATNA : गैर क्रीमीलेयर प्रमाणपत्र में जाति, आय व आवासीय की जरूरत नहीं, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भगवान लाल ने दी जानकारी, राज्य सरकार ने विमर्श के बाद इस पर सहमति दे दी : नौकरी में जातीगत रिजर्वेशन नहीं पाने वाले युवओं के लिए खुशखबरी है। बिहार की नीतीश सरकार के आग्रह पर केंद्र की मोदी सरकार ने सहमति प्रदान करते हुए बात मान ली है। ताजा अपडेट के अनुसार गैर क्रीमीलेयर वाले युवाओं को प्रमाणपत्र में जाति, आय व आवासीय प्रमाणपत्र देने की जरूरत नहीं होगी।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. भगवान लाल साहनी ने कहा है कि क्रीमीलेयर रहित सर्टिफिकेट बनाने के लिए जाति, आय, आवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता अब बिहार में नहीं होगी। पहले क्रीमिलेयर सर्टिफिकेट बनाने के लिए लोगों को जाति, आय व आवास प्रमाण पत्र देना होता था। इस कारण लोगों को काफी परेशानी होती थी। राज्य सरकार ने विमर्श के बाद इस पर सहमति दे दी है।

बिहार दौरे पर आए साहनी ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस मसले पर हमने जब राज्य सरकार से बात की तो सरकार ने हमारी बात मान ली। अब अभ्यर्थियों द्वारा दिये जाने वाले आवेदन के वेरिफिकेशन के बाद सीधे क्रीमीलेयर सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाएगा। परीक्षा में जारी कोडिंग सिस्टम पर कहा कि बिहार में यह लागू है। इससे लोगों को बहुत फायदा होता है। इस सिस्टम से कॉपी जांच होने से सही लोग सफल होते हैं। केंद्र सरकार से बिहार की परीक्षाओं में संचालित कोडिंग प्रणाली को पूरे देश में लागू करने की मांग करेंगे। इससे आयु, जाति के आधार पर अभ्यर्थियों से होने वाले पक्षपात को रोका जा सकेगा। इन्हे भी जरूर पढ़ें

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