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अनुकंपा की नौकरी पाने की 100 परसेंट हकदार है विवाहित बेटियां, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला


RAJASTHAN- विवाहित बेटी पिता की जगह अनुकंपा नौकरी की हकदार…माता-पिता के वृद्ध होने पर विवाहित बेटी देखरेख के लिए भी बेटे की तरह जिम्मेदार, कोर्ट ने कहा… शादी के बाद बेटी पिता के परिवार की नहीं, बल्कि पति के परिवार की हो जाती है… ऐसे खयालात पुराने; विवाहित बेटा-बेटी एक समान हैं। अनुकंपा वाली नौकरियों में पेंच तब और फंस जाता है, जब बेटे-बेटियां एक ही नौकरी पर दावा करते हैं

जैसलमेर की शोभा के पिता गनपत सिंह चौहान लाइनमैन थे। 2016 को उनकी मृत्यु हो गई। पीछे पत्नी और विवाहित बेटी शोभा बच गईं। शोभा ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। 6 जून 2017 को विद्युत निगम ने आवेदन निरस्त करते हुए कहा- विवाहित महिला आश्रित की कैटेगरी में नहीं आती। इस पर महिला ने कोर्ट की शरण ली थी।

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक विवाहित महिला को उसके पिता की जगह अनुकंपा नौकरी देने का आदेश देते हुए कुछ अहम टिप्पणियां की हैं। जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमि. ने एक महिला का आवेदन यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि वह अब पति के परिवार का हिस्सा है, इसलिए उसके अधिकार भी उसी परिवार में हैं। महिला इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची थी।

जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी की बेंच ने महिला को नौकरी देने का आदेश देते हुए कहा- ‘शादी के बाद बेटी पिता के कुनबे का हिस्सा नहीं रहती, बल्कि वह पति के कुनबे का हिस्सा हो जाती है, ये खयालात बहुत पुराने हो चुके हैं। वह अपने पिता के अधिकारों में हमेशा हमवारिस रहती है। जैसे अधिकार उसके अविवाहित होने पर रहते हैं, वैसे ही विवाहित होने के बाद भी रहते हैं। क्योंकि, किसी के अविवाहित या विवाहित होने से उनके माता-पिता के साथ रिश्ते नहीं बदल जाते, न ही उनकी जिम्मेदारी कम हो जाती हैं। वह पिता की अनुकंपा नौकरी की उतनी ही हकदार है, जितना कि बेटा। विवाहित होने के बाद भी जैसे एक बेटा अपने माता-पिता की देखरेख के लिए जिम्मेदार होता है, ठीक वैसे ही बेटी भी बराबर की जिम्मेदार होती है। विवाहित होने से बेटी की जिम्मेदारियां कम नहीं हो जातीं… और जब विवाहित बेटे और विवाहित बेटी की जिम्मेदारी एक समान है तो फिर अनुकंपा नौकरी के समय विवाहित बेटी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।’

अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरियों के लिए राज्य सरकारों के अपने-अपने नियम हैं। कई बार मामला तब और पेचीदा हो जाता है, जब अनुकंपा नौकरी के लिए मृतक के बेटे और बेटियां एक साथ आवेदन कर देते हैं। ऐसे में अदालतें सभी पक्षों के एजुकेशनल और प्रोफेशनल योग्यता के आधार पर फैसले सुनाती हैं। इन्हे भी जरूर पढ़ें

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