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बिहार के साथ फिर हुआ धोखा, बजट में ना तो विशेष राज्य का दर्जा मिला ना स्पेशल पैकेज



बिहार के साथ फिर हुआ धोखा, बजट में ना तो विशेष राज्य का दर्जा मिला ना स्पेशल पैकेज
PATNA-बिहार के साथ फिर हुआ धोखा, बजट में ना तो विशेष राज्य का दर्जा मिला ना स्पेशल पैकेज : बिहार की तीन विशेष मांगों पर वर्ष 2022-23 का केंद्रीय बजट मौन है। इनमें विशेष राज्य का दर्जा, विशेष आर्थिक सहायता और कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने के बारे में से किसी प्रावधान का उल्लेख बजट में नहीं है। साथ ही, बजट में नदी जोड़ योजना का जो प्रावधान किया गया है, उसमें राज्य की महत्वाकांक्षी कोसी-मेची परियोजना को शामिल नहीं किया गया है।

हालांकि, केंद्रीय बजट में की गई घोषणा से बिहार में 2-टीयर एवं 3- टीयर शहरों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। गौरतलब है कि राजधानी पटना समेत बिहार के तमाम शहर इसी दो श्रेणी के तहत आते हैं। इसके अलावा, आधारभूत संरचना के विकास के प्रावधानों से भी बिहार को लाभ होगा। इससे बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) का विस्तार होगा। लगभग एक हजार किमी सड़कें बनेंगी।

इसके अलावा नए बजटीय प्रावधान से राज्य में फल-सब्जी उत्पादों को पैकेज मिलने के आसार बने हैं। किसानों की आमदनी बढ़ाने की इस योजना के तहत केन्द्र सरकार ने बिहार में चल रही जैविक कॉरिडोर योजना को अपना लिया है। देश में गंगा किनारे के पांच किलोमीटर क्षेत्र में जैविक कॉरिडोर बनाने की केन्द्र की योजना है। इससे राज्य की जैविक कॉरिडोर योजना को विस्तार मिलेगा। साथ ही इस पर खर्च होने वाली राशि में भी केन्द्रीय सहायता मिलने की उम्मीद बढ़ी है। इस कॉरिडोर में मुख्यत: सब्जी का उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना है। वहीं, केन्द्र सरकार ने नये बजट में घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए समग्र योजना के कार्यान्वयन की घोषणा की है। केन्द्र का प्रयास तिलहनों के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने की है। इसके लिए तिलहनों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से योजना लागू की जाएगी। इस योजना से बिहार में तिलहन का उत्पादन बढ़ेगा और आयात कम होने से कीमतों पर तो नियंत्रण होगा ही आत्मनिर्भर होने की ओर हम आगे बढ़ेंगे।

पांच फीसदी कर्ज लेने की सीमा का आग्रह किया था

राज्यों के कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाने की मांग बजट पूर्व बैठक में बिहार की ओर से की गयी थी। बिहार ने पांच फीसदी कर्ज लेने की सीमा निर्धारित किए जाने का आग्रह किया था। कांग्रेस काल में यह 4.5 फीसदी थी। इसे घटाकर केंद्रीय बजट में अब चार फीसदी कर दिया गया है। इससे बिहार को जहां 7 से 8 हजार करोड़ रुपये बाजार से उपलब्ध हो सकता था लेकिन अब राज्य के कर्ज लेने की क्षमता कम हो जाएगी। हालांकि, ब्याज मुक्त ऋण की व्यवस्था केंद्रीय बजट में होने से राज्य को मात्र 7 से 8 करोड़ रुपये प्राप्त होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि बिहार ने केंद्रीय बजट के पूर्व विशेष राज्य का दर्जा या विशेष आर्थिक सहायता की मांग की थी। इन्हे भी जरूर पढ़ें

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