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महा'ड्रामे के पांच अहम मोहरे कौन, जिन पर टिकी है महाराष्ट्र की सियासत

 महाराष्ट्र में सरकार बनाने और गिराने की राजनीति के बीच सियासी ड्रामा लगातार जारी है। इस बीच हाशिए पर आ चुकी उद्धव सरकार पुरजोर कोशिश में लगी है कि किसी तरह से महा विकास अघाड़ी को बचा लिया जाए क्योंकि कमोवेश ये महाराष्ट्र में उनकी नाक का सवाल बनता दिख रहा है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने शिंदे को जोड़कर राजनीतिक मायने बदल दिए हैं।


मुंबई : महाराष्ट्र सरकार को लेकर मंगलवार सुबह से शुरू हुए सियासी घटनाक्रम को देखें तो लगता है कि सत्ता की शतरंज का जो खेल चल रहा है, उसमें हार जीत या फिर उतार-चढ़ाव लाने वाले कुछ जाने पहचाने चेहरे हैं। जो कि इस राजनीतिक दंगल में अलग-अलग मोहरे बनकर अलग भूमिका निभा रहे हैं। हमारी इस रिपोर्ट में समझिये कि आखिरकार महाराष्ट्र में चल रही कुर्सी की लड़ाई में कौन किस भूमिका में नजर आ रहा है ?


एकनाथ शिंदे: शिंदे ने बगावत कर महाराष्ट्र सरकार को संकट में डाल दिया है। 18 साल की उम्र से शिवसैनिक हैं। बालासाहेब ठाकरे और ठाणे में शिवसेना के दिग्गज नेता आनंद दिघे के निष्ठावान रहे हैं। एक जमाने में रिक्शा चलाते थे। आज महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री हैं। बेटा शिवसेना सांसद है और शिंदे खुद चार बार विधायक रहे हैं। शिंदे शिवसेना के एनसीपी और कांग्रेस के साथ जाने से नाराज है। महा विकास अघाड़ी में ढाई साल सत्ता सुख भोगने के बाद अचानक अपनी पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से मांग कर रहे हैं कि एनसीपी-कांग्रेस के साथ गठबंधन खत्म कर बीजेपी के साथ सरकार बनाई जाए।


उद्धव ठाकरे: उद्धव ठाकरे शिवसेना के पार्टी प्रमुख है और महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन वाली महा विकास अघाड़ी के मुख्यमंत्री हैं। 2014 में बीजेपी ने शिवसेना से गठबंधन तोड़ा था। बदले में इन्होंने 2019 में बीजेपी से गठबंधन तोड़ उसे सत्ता से दूर कर दिया और एनसीपी-कांग्रेस के साथ मिलकर पिछले ढाई साल से गठबंधन सरकार चला रहे हैं। कभी बीजेपी के प्रमुख सहयोगी रहे उद्धव इस समय बीजेपी के प्रमुख आलोचकों में से एक हैं। इस वक्त अपने जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती से जूझ रहे हैं। एकनाथ शिंदे की बगावत से इनके सामने दोहरी चुनौती है कि सत्ता बचाएं या फिर अपनी पार्टी बचाएं।

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