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चीनी जेट J-20 के आगे फेल राफेल - चीन की मीडिया


चीन की मीडिया ने इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) को मिले पांच राफेल जेट्स पर टिप्‍पणी की है। चीनी मीडिया ने इसे चीनी जेट जे-20 से भी कम स्‍तर का करार दिया है। चीन की मीडिया के इस दावे पर पूर्व आईएएफ चीफ, एयर चीफ मार्शल (रिटायर्ड) बीएस धनोआ ने उसे जवाब दिया है। आपको बता दें कि 29 जुलाई को पांच राफेल जेट का पहला बैच हरियाणा के अंबाला स्थित एयरफोर्स स्‍टेशन पर पहुंचा है। भारत ने 36 राफेल की डील फ्रांस से की थी और बाकी राफेल साल 2021 तक देश को मिल जाएंगे।

मिलिट्री एक्‍सपर्ट के हवाले से दावा

चीनी सरकार के अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स ने लिखा है कि आईएएफ का राफेल जेट सिर्फ सुखोई-30एमकेआई से ही श्रेष्‍ठ हैं। लेकिन यह चीनी जेट जे-20 चेंगदू के स्‍तर से नीचे हैं। इस पर धनोआ ने जवा‍ब दिया है कि चीन का जे-20 राफेल के करीब भी नहीं आ सकता है। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने मिलिट्री एक्‍सपर्ट झांग श्‍यूफेंग के हवाले से लिखा है कि राफेल सिर्फ एक चौथी पीढ़ी का जेट है और इसमें कोई भी गुणात्‍मक बदलाव नहीं हैं। श्‍यूफेंग को चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का करीबी माना जाता है।

चीन के खिलाफ एक बड़ा कदम

ग्‍लोबल टाइम्‍स के मुताबिक राफेल सिर्फ एक तीसरी पीढ़ी का फाइटर जेट और जे-20 की स्‍टेल्‍थ क्षमताओं में यह काफी पीछे है। पूर्व आईएएफ धनोआ ने राफेल को 4.5 पीढ़ी का फाइटर जेट करार दिया है। उन्‍होंने कहा कि अगर जे-20 इतना ही ताकतवर है तो फिर इसके पास अमेरिकी जेट एफ-22, एफ-35 और रूस के पांचवीं पीढ़ी के जेट सु-57 जैसी क्षमताएं क्‍यों नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि जे-20 की स्‍टेल्‍थ क्षमताओं को देखने के बाद इसे पांचवीं पीढ़ी का जेट कहना भी गलत है। धनोआ का कहना है कि अंबाला में उतरे पांच राफेल जेट के आगे चीन के खिलाफ जारी युद्ध एक कदम और आगे जाएगा।

राफेल के बाद IAF हुई ताकतवर

उन्‍होंने कहा राफेल के आने से वायुसेना काफी ताकतवर हो गई है और चीन इसके करीब भी नहीं पहुंच सकता है। पिछले वर्ष आईएएफ चीफ के पद से रिटायर हुए बीएस धनोआ ने ही पहली बार कहा था कि राफेल एक गेम चेंजर साबित होगा। उन्‍होंने बताया कि राफेल के पास टॉप लाइन के इलेक्‍ट्रॉनिक वॉरफेयर हैं। इसके अलावा ये मीटिओर और स्‍कैल्‍प जैसी मिसाइलों से लैस है। इन हथियारों की वजह से चीन की वायुसेना अब आईएएफ के आगे कहीं नहीं टिकती है। उन्‍होंने यह माना है कि चीनी जेट जे-20 पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है। लेकिन उन्‍हें इस बात का पूरा भरोसा है कि राफेल और सुखोई के होने से आईएएफ अब चीन की किसी भी चुनौती का सामना आसानी से कर सकता है।

दुश्‍मन आसानी से पकड़ ले चीनी जेट

एयर मार्शल (रिटायर्ड) आर नाबिंयार जिन्‍होंने राफेल की फ्लाइट टेस्टिंग की थी, उन्‍होंने इंडिया टुडे से कहा, 'राफेल, चीन के चेंगदू जे-20 जेट से कहीं ज्‍यादा श्रेष्‍ठ फाइटर जेट है। यह भले ही एक पांचवीं पीढ़ी का जेट हो, लेकिन यह किसी 3.5 पीढ़ी के एयरक्राफ्ट जितना ही क्षमतावान है। इस जेट में तीसरी पीढ़ी के वही इंजन हैं जो सुखोई में लगे हैं।' विशेषज्ञ चेंगदू जेट की स्‍टेल्‍थ क्षमता भी संदेह में है। किसी जेट स्‍टेल्‍थ क्षमता बताती है कि वह कितनी बेहतर से दुश्‍मन के रडार से छिपते हुए अपने टारगेट पर निशाना लगा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जे-20 के बारे में चीन ने जो भी बातें कहीं हैं उन पर भरोसा करना मुश्किल है।
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